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19.9.17

मध्य प्रदेश टुडे अखबार की धोखाधड़ी






18.9.17

छह पत्रकारों का हुआ सम्मान

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अपर्णा बाजपेई का ब्लाग- 'बोल सखी रे'


ब्लाग का नाम- बोल सखी रे
संचालक -अपर्णा बाजपेई 

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मौखिक इतिहास (1942) को लिपिबद्ध करने की जरूरत: महाजन
नई दिल्ली। प्रो बी बी कुमार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने विचारों का राजनीतिकरण किया, जिससे अंग्रेजों को देश का विभाजन करने में काफी सहूलियत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पर वर्चस्व स्थापित करने की उनकी रीति-नीति से राष्ट्र में ज्ञान और चिंतन की पूरी दिशा ही भटक गई, जिससे देशवासियों को भारी क्षति हुई है। इसलिये इस स्थिति को नए सिरे से बदलने की जरूरत है। प्रो कुमार स्थानीय गांधी शांति प्रतिष्ठान में अमर शहीद डॉ शिवपूजन राय प्रतिष्ठान के तत्वावधान में अगस्त क्रांति के 75वें वर्ष के मौके पर आयोजित अमर शहीद स्मृति समारोह 2017 में अपना अध्यक्षीय उद्गार व्यक्त कर रहे थे।

16.9.17

कोहबर कला को बचाने की कवायद



मिथिला कला बिहार के मिथलांचल क्षेत्र की लोक कला है और 'रामायण' तथा 'महाभारत' में इसका उल्लेख मिलता है. इसकी उत्पत्ति 'कोहबर' से हुई है. कोहबर एक ऐसे कमरे को कहा जाता है, जहां मैथली शादी के दौरान रस्में और रीति-रिवाज किये जाते हैं और उस कमरे की दीवारों पर देवी-देवताओं और अन्य शुभ प्रतीकों की छवियों को चित्रित किया जाता हैं. इसी कला को एक पहचान दिलाने वाले चेहरे का नाम है उषा झा. जिन्होनें इस कला को रोज़गार का साधन बना कर जन्म दिया पेटल्स क्राफ्ट को. उषा आज के दौर में पटना का एक बड़ा नाम है. इस काम की शुरूवात उषा ने भले ही थोड़े से शिल्पकारों के साथ की लेकिन आज उनके साथ तकरीबन 300 से अधिक प्रशिक्षित स्वतंत्र महिलाएं उनके साथ काम करती हैं. 'पेटल्स क्राफ्ट' की शुरुआत 1991 में उषा झा के घर पटना के बोरिंग रोड से हुई, जहाँ से वे आज भी काम करती हैं. इस काम की शुरूवात उन्होंने अपने घर के एक छोटे से कमरे से की थी. उषा ने थोड़े से शिल्पकारों के साथ अपने काम की शुरुआत की थी, जिनमें से दो तो उनके घर से काम करती थीं, जबकि शेष अन्य मिथिलांचल में रह कर काम करती थीं.

निकम्मी सरकार का ब्रेनवाश गेम

क्या आप जानते हैं की सरकार ने अपनी मुख्य जिम्मेदारियों को व्यवसाय बना दिया है और व्यवसाय को अपनी जिम्मेदारी बना लिया है। चूँकि सरकार यह काम बरसो से कर रही है, इसलिए अधिकांश लोगों का दिमाग ब्रेन वाश हो चुका है। वह इस सच्चाई को कबूल ही नहीं कर पाएंगे कि बिजली-सड़क बनाना सरकार की मूल जिम्मेदारी नहीं है, यह सशुल्क सेवा है। इसके लिए सरकार अलग से रोड टैक्स, टोल टैक्स, व्हीकल एक्ट के तहत वसूली करवाई व बिजली बिल लेती है। इसलिए कहना बेईमानी होगी कि आपके प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर का पैसा इन कामों में लाया जाता है।

जीएसटी: सामने आएगी प्रिंट मीडिया की धांधली

अक्टूबर से सरकार जीएसटी को लेकर सख्त हो जाएगी जिससे दो नंबर के कारोबार में हाहाकार मच सकता है। बात करे प्रिंट मीडिया की तो एक बहुत बड़ी धांधली बाहर आएगी.  दरअसल प्रिंटिंग प्रेस पर 18 प्रतिशत की जीएसटी लगेगा, पहले यह 6 प्रतिशत था। यदि जीएसटी सही संकल्पना के साथ लागू हो गया तो कईयों की फिल्म बन सकती है।

पेट्रोल-डीजल बाजार आसमान पर

वित्त मंत्रालय का आर्थिक सर्वे बताता है कि किस तरह आज का तेल (पेट्रोल-डीजल) बाजार कुछ साल पहले के तेल बाजार से बिल्कुल अलग है ।  इसके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें काफी नीचे आई हैं और सरकार इससे बहुत राहत महसूस कर रही है ।  लेकिन इस सर्वे को पढ़ने वाले आम भारतीय हैरान हो सकते हैं कि तेल बाजार में इतने बड़े बदलाव के बाद भी राहत जैसी कोई चीज उन्हें महसूस क्यों नहीं हो रही । नरेंद्र मोदी सरकार ने जब से सत्ता संभाली हैं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आधी हो चुकी हैं, लेकिन इसका आम उपभोक्ताओं की जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ा । 

नवीन जोशी ने 'नाद रंग' का पहला अंक देखकर यह लिखा आर्टकिल

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15.9.17

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