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22.3.11

फिर छले जाने की आशंका है किन्नरों व विकलांगों को

विधानसभा चुनाव-2011

शंकर जालान
पश्चिम बंगाल में अप्रैल और मई में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों व पार्टी समर्थकों में खासा उत्साह है। वहीं, महानगर के विकलांगों और किन्नरों में इस चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं है। उन्हें हर चुनाव की तरह इस बार भी फिर छले जाने का अंदेशा है। विकलांगों व किन्नरों का नाम मतदाता सूची में दर्ज होने के बावजूद राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवार चुनाव के बाद इन्हें भूल जाते हैं। क्या आपको मालूम हो कि अगले महीने राजय में विधानसभा का चुनाव होने वाला है? चुनाव को लेकर आप क्या सोचते हैं? किस उम्मीदवार को जीताना चाहते है? किसकी सरकार चाहते है? वोट मांगने आए नेताओं से क्या गुजारिश करना चाहते हैं? इन सवालों का उत्तर जानने के लिए जब शहर के कई विकलांगों व किन्नरों से बातचीत की गई तो इन लोगों ने कहा कि चुनाव को लेकर उनमें कोई उत्साह नहीं है। हर दल के उम्मीदवार चुनाव के पहले वोट मांगने आते हैं और वोट देने के बदले बड़े-बड़े आश्वासन दे जाते हैं, लेकिन चुनाव का नतीजा आने के बाद जीतने वाला उम्मीदवार अन्य कामों में व्यस्त हो जाता है व हारे हुए के हाथ में कुछ नहीं होता और हम जैसे लोग चुनाव के नाम पर फिर से छले जाते हैं।
जदूलाल मल्लिक लेन का निवासी 32 वर्षीय विकलांग रामकुमार भट््ट ने बताया कि विभिन्न चुनाव मौके पर आए वोट मांगने आए विभिन्न दलों के उम्मीदवार यहीं कहते हैं कि जीतने के बाद हम सदन में विकलांगों को विशेष सुविधा देने की बात उठाएंगे, लेकिन हकीकत में होता कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि करीब 14 साल पहले सड़क दुर्घटना में मेरा एक पैर जाता रहा और तब से मैं बैशाखी के सहारेचल रहा हूं। भट््ट ने कहा विकलांग का कार्ड बनाने के लिए मैंने न जाने कितनी बार स्थानीय पार्षद, विधायक और सांसद के कार्यालय का चक्कर लगाए, लेकिन आज तक मेरा कार्ड नहीं बन पाया। उन्होंने कहा कि हमें किसी दल के किसी उम्मीदवार से कुछ नहीं कहना है, क्योंकि चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद नेताओं के पास हम जैसे विकलांग और गरीब लोगों के लिए सोचने का वक्त ही कहां रह जाता है। भट््ट ने बताया कि इस चुनाव को लेकर उनके मन में कोई उत्साह नहीं है और न ही किसी दल से कोई उम्मीद।
रवींद्र सरणी के रहने वाले संजय अग्रवाल, मदन चटर्जी लेन के रहने वाले अनूप पोद्दार, सर हरिराम गोयनका स्ट्रीट के अतुल दोषी, काली कृष्ण टैगोर स्ट्रीट के चंद्रशेखर शर्मा समेत कई विकलांगों ने भी कहा कि चुनाव का उनके जीवन में कोई महत्त्व नहीं रह गया है।
इसी तरह पार्वती घोष लेन की रहने वाले किन्नर रमा बाई, तुलसी बाई, कौशल्या बाई, रजनी बाई समेत कई किन्नरों से लोकसभा चुनाव के बारे में पूछने पर पहले तो इन लोगों ने कुछ भी कहने से मना किया। काफी पूछने पर इन किन्नरों ने सामूहिक रूप से कहा कि हमें चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। कोई भी नेता हमारे लिए कुछ करने वाला नहीं है। सभी लोग हमें गलत नजर से देखते हैं। यह पूछ जाने पर कि आप लोग चुनाव शब्द से ही नाराज हो रहे है और मध्य प्रदेश में आप ही के समाज की शबनम मौसी चुनाव लड़ी भी है और जीती भी है। इसके अलावा देश भर में कई किन्नरों ने चुनाव में भाग्य आजमाया है। इसके जवाब में इन किन्नरों ने कहा कि शबनम मौसी के चुनाव जीतने के पहले देश भर में किन्नरों की जो स्थिति थी उसके बाद भी हम लोगों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इन लोगों ने कहा कि जब भगवान ने हमारे साथ मजाक किया है तो किसी नेता की क्या मजाल कि वे हमारी स्थिति सुधार सके।

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