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24.5.11

संगठन, सत्ता के सिधान्त व डॉ लोहिया

संगठन व सत्ता के सिधान्त व डॉ लोहिया अरविन्द विद्रोही यह सर्व विदित है की किसी भी लोकतान्त्रिक संघठन के सफल संचालन हेतु कार्यकर्ता,कार्यालय,कार्यक्रम,कोष,क्रियान्वयन अनिवार्य तत्त्व होते हैं| सिधान्त विहीन अवसरवादी राजनीति राजनीति आज के दौर में अपना परचम लहरा रही है| दल बदल व पूंजीवाद के सहारे सत्ता के गलियारे में अपना वजूद बने रखने के फेर में माहिर फरेबी किस्म के लोगो ने अपना पाला बदलना व भावनात्मक प्रलाप शुरु कर दिया है| आज राजनीति स्याह व संक्रीन हो चुकी है| काजल की कोठरी बन चुकी इस राजनीति में बेदाग रहना ही एक बड़ी उब्लाब्धि है| आज संघठन आधारित राजनीति का स्थान व्यक्ति,व्यक्ति के परिवार की चाटुकारिता व जी हजुरी ने ले लिया है| प्रख्यात समाजवादी विचारक व चिन्तक डॉ राम मनोहर लोहिया राजनीति में परिवार वाद के कट्टर विरोधी थे| वो इसे राजतन्त्र मानते थे| डॉ लोहिया आजाद भारत की दुर्दशा का कारण आजाद भारत की कांग्रेसी सरकार व पंडित नेहरु को मानते थे| कांग्रेस के खिलाफ गैर कांग्रेस वाद की मुहीम को साकार रूप लोहिया ने दिया था| आज डॉ लोहिया के विचार व सोच कार्यकर्ताओ की उपेक्षा व अवसर वादिओं को बढ़ावा दिये जाने के कारण नेपथ्य में चलते चले जा रहे हैं | डॉ राम मनोहर लोहिया राजनीति को समाज सेवा का माध्यम मानते थे | राजनीति में विचार व सिधान्त को सर्वोपरि मानने वाले डॉ लोहिया ने अपने सम्पुर्न्य जीवन में कभी भी संघर्ष शील साथियों - कार्यकर्ताओं की ना तो उपेक्षा की और ना ही चुनावी लाभ के दृष्टिकोण से अपने विचारों और सिधान्तों से समझोता किया | दरअसल १९६७ का वाकया है -- इस समय डॉ राम मनोहर लोहिया संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता थे | खुद कन्नौज सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे तथा दल के अन्य उम्मीदवारों की सभाओं में भाषण भी देने जाते थे | इस समय विधान सभा व लोक सभा दोनों के चुनाव साथ साथ हो रहे थे | डॉ लोहिया १९६३ में फर्रुखा बाद लोकसभा सरात से उपचुनाव में विजई होकर प्रथम बार सांसद बने थे | डॉ लोहिया समान नागरिक संहिता को लागु करने की आवाज उठाया करते थे | मुस्लिमो के एक बड़ा तबका डॉ लोहिया के इस विचार से आक्रोशित था | इलाहबाद में १९६७ के आज चुनावों में डॉ लोहिया को एक विशाल चुनावी सभा को संबोधित करना था | संसोपा के उम्मीदवारों का मानना था कि डॉ लोहिया का सभा में समान नागरिक संहिता का समर्थन करना उनके चुनावों में प्रतिकूल असर डालेगा | डॉ लोहिया सड़क मार्ग से प्रताप गढ़ से इलाहबाद आने वाले थे | समाजवादी नेता सत्य प्रकाश मालवीय ने गंगा पर - फाफा मौऊ बाज़ार में डॉ लोहिया का स्वागत किया और उसने साथ कार में ही बैठ लिए | कार में कैप्टेन अब्बास अली भी थे | सत्य प्रकाश मालवीय ने किसी तरह प्रत्याशियो की बात डॉ लोहिया से कही | डॉ लोहिया ने कहा ---- तुम चाहो तो मुझे मीटिंग में मत ले जाओ | लेकिन मीटिंग में यदि मुझसे प्रश्न पूछा गया या किसी ने वहा इस विषय पर चर्चा की , तो उसका वही उत्तर दूंगा जो मेरी राय है ,मेरी विचारधारा है | मैं वोट के लिए विचारधारा नहीं बदला करता भले ही मैं हार जाऊ , पार्टी के सभी उम्मीदवार हार जाएँ | मेरी विचारधारा मैं समझता हूँ देश हित में है और देश दल से , चुनावो से बड़ा है | आज उत्तर प्रदेश में आगामी विधान सभा के चुनावों में सत्ता प्राप्ति के लिए जिस प्रकार का दांव - पेंच व निष्ठा परिवर्तन का कार्य करने वालो को पुराने समाजवादी कार्यकर्ताओं के हक की कीमत पर समाजवादी पार्टी का नेतृत्व स्थापित कर रहा है , वाह डॉ लोहिया के समाजवादी विचार धारा के प्रति समर्पण व दृढ़ता के सिधान्त के नितांत प्रतिकूल है | इस प्रकार का आचरण समाजवादी चरित्र का परिचायक ना हो कर के सत्ता लोलुप चरित्र का घोतक है | सिर्फ डॉ लोहिया का नाम जपने व उनकी फोटो पे माला चढाने, उनके नाम से ट्रस्ट चलने से कोई उनका अनुयायी नहीं हो जाता, उनके विचारों को व्यव्हार में अमल करने वाले ही लोहिया के लोग है | कार्यकर्ताओं के हक के लिए लड़ने वाले डॉ लोहिया के तात्कालिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष का पालन ही कर रहे है और इनको करना भी चाहिए | तानाशाही के खिलाफ लड़ते लड़ते कब खुद तानाशाह सा आचरण करने लगते हैं राजनेता इसका इनको पता ही नहीं चलता,अब लोहिया के लोगो की हुनकर ही इनका भ्रम तोड़ेगी.....

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