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27.10.11

भारतीय लोकतंत्र में आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई

भारतीय लोकतंत्र में आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई

                                               बहुत पहले ....उन दिनों ,  जब बिहार में लालू प्रसाद का राज था ....तो टीवी पर एक परिचर्चा आ रही थी . प्रश्न आया की आखिर लालू जी बिहार में कानून व्यवस्था को टाईट क्यों नहीं करते .....इस पर एक सज्जन ने कहा की लालू यादव जान बूझ कर ये अराजकता बनाए रखना चाहते हैं क्योंकि कानून व्यवस्था ठीक होने से लालू जी का वोटर नाराज़ हो जाता है .......जी हाँ ....एक वर्ग ऐसा भी था जो उस अराजकता को एन्जॉय कर रहा था .......उसी अराजकता से उसकी रोज़ी रोटी ( लूट पाट ) चल  रही थी .........
                                    आज भारत सरकार से ये प्रश्न अक्सर पूछा जाता है की आखिर वो आतंकी घटनाओं पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही है .......अमेरिका ने दूसरा 9 /11  नहीं होने दिया ......उन्होंने कैसे रोक लिया ........हम क्यों नहीं रोक पाते ...........अब इसका कोई एक सीधा सा जवाब तो नहीं हो सकता .........पर इसका एक बहुत बड़ा कारण भारत का लोकतंत्र ,भारत की राजनीति ज़रूर है ......... आतंकवाद रोकने के लिए भैया सख्ती करनी पड़ेगी .........निगरानी करनी पड़ेगी .....तालाशी लेनी पड़ेगी ......लोगों को पूछताछ के लिए बुलाना पड़ेगा .........मोहल्ले में कौन कहाँ रहता है ...कौन आया कौन गया इसकी जानकारी रखनी पड़ेगी ............अब किसकी निगरानी करोगे ....किस से पूछ ताछ करोगे ........दुनिया इस्लामिक आतंकवाद से त्रस्त है ....तो निश्चित रूप से शक के दायरे में मुसलमान ही रहेंगे ......तो  यहाँ भारत में जैसे ही पुलिस किसी मुसलमान के घर घुसी , बवाल मच जाता है ........देखो बेचारे मुसलमान को सता रहे हैं ...फिर शुरू हो जाता है मीडिया ...सातवें सुर में ........हाय हाय देखो बेचारे मुसलमान को पकड़ लिया ......सिर्फ मुसलामानों से पूछताछ हो रही है .........उसके मदरसे की निगरानी हो रही है .......मोहल्ले में मुसलामानों की गिनती कर रही है सरकार .......हाय हाय  मेरी तालाशी सिर्फ इसलिए ली क्योंकि मैं मुसलमान हूँ .......और सरकार तुरंत दबाव में आ जाती है ....तुरंत गृह मंत्री से बोलती है ..........अरे भाई क्या कर रहे हो  ????? इनका वोट  भी लेना है यार .......पिछले साल जब पूना में बम धमाके हुए तो सरकार ने बाकायदा गृह विभाग को निर्देश भेजा की ...सम्हाल के ....मुस्लिम भाइयों को बुरा न लगे .....पिछले सालों में आम तौर पर आतंकी घटनाओं से सिर्फ मुसलामानों को जोड़ के देखा जाता था ....फिर उसमे एक हिन्दू एंगल जुड़ गया .......समझौता ट्रेन ब्लास्ट और मालेगांव में हिन्दुओं का हाथ पाया गया .......तब जा के सरकार की जान में जान आयी ....चलो मामला कुछ तो बैलेंस हुआ .........और फिर मुंबई के पुलिस कमिश्नर हेमंत करकरे रातों रात मुसलामानों के मसीहा हो गए ...........और फिर जब 26 /11  हुआ तो अंतुले साहब और दिग्विजय सिंह ने बाकायदा बयान  दिया कि  देख लेना भैया ...हेमंत करकरे भी मरे हैं ...कहीं RSS का हाथ न हो ............वाह ...सुभान अल्लाह ........क्या approach  है आतंकवाद के प्रति .......आपको क्या लगता है  ? क्या ये बयान बस यूँ ही दे दिए गए ........26/11 के बाद जब मुस्लिम समाज अपराध बोध से ग्रस्त था ...तो इस एक बयान  ने उस पे मरहम लगाने का काम किया ...चलो हम ही नहीं RSS  भी है आतंकी संगठन ....सिर्फ हम ही नहीं , हिन्दू भी आतंकी होता है .....हिन्दू आतंकवाद जैसी चीज़ भी है दुनिया में ...........और आपको क्या लगता है ? दिग्विजय सिंह ने यूँ ही कह दिया ...." ओसामा जी " .......वो ( कांग्रेस ) जानते हैं की मुसलमान ओसामा को "जी" मानता है ........यह एक बहुत बड़ी और बड़ी कडवी सच्चाई है कि  पूरी दुनिया का मुसलमान ओसामा को हीरो मानता है ......कहीं सरेआम तो कहीं चुपचाप .......तो ओसामा " जी " कहने से वोट मिलते हैं भाई .......नहीं तो ये नेता तो अपने बाप को भी जी न बोलें .........मजबूरी है भारतीय लोकतंत्र की ......14 करोड़ मुसलमान का वोट .........आज भारत के राजनेता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को  SIMI और इंडियन मुजाहिदीन जैसा संगठन  बताते हैं ....लालू और मुलायम ,  सिमी पर लगे प्रतिबन्ध का विरोध करते हैं ..........वो कहते हैं कि सिमी पर लगाया है तो RSS पर भी लगाओ ....आपको क्या लगता है कि ऐसा वो क्यों करते हैं .....सिर्फ मुस्लिम जनमानस को संतुष्ट करने के लिए ......आतंकवादी का ठप्पा लगने से पैदा हुए ज़ख्मों पर मरहम लगाने के लिए ........
                              UPA 1  में जब मनमोहन की सरकार आयी तो जो काम सबसे पहले सरकार ने किया वो ये की POTA  हटा दिया  ...ये कह के कि ये draconian  law  है ..... कि इसका दुरुपयोग होता है ....हो सकता है ..........और ये की पहले से बहुत से कानून हैं जो निपट सकते हैं आतंकवाद से .......किसी नए कानून की ज़रुरत नहीं ......लो हो गया मुसलमान खुश .....मिल गए वोट .....हो गया आतंकवाद ख़तम ........नरेन्द्र मोदी ने अरसा पहले GUJKOKA का ड्राफ्ट भेजा था केंद्र के पास ...लौटा  दिया गया ........क्योंकि केंद्र सरकार मानती है कि यह कानून सिर्फ  मुसलामानों को परेशान करने के लिए लाया जा रहा  है .........इस से मुसलमान नाराज़ हो जाएगा ..........जबकि ठीक ऐसा ही कानून शब्दशः महाराष्ट्र में लागू है ..........UPA की सरकार कहती है की वर्तमान कानून ,  जो कि  unlawful activities के लिए है ....वही पर्याप्त है आतंकवाद से निपटने के लिए .........जबकि आतंकवाद से  निपटने के लिए बेहद सख्त कानून की ज़रुरत है ........ज़बरदस्त  राजनैतिक  इच्छाशक्ति की ज़रुरत है ...........परन्तु भारतीय लोकतंत्र में मुसलामानों के वोट का गणित इसकी इजाज़त नहीं देता .
                                   


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