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28.2.12

रामदेव को मार, आतंकवादियों के लिए 'छलका' दुलार!देश के प्रति यह कैसा प्यार?

दोस्तों, जब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाई थी, उस वक्त उन्होंने यह बिल्कुल नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब अपने देश के नेता ही एक गंदी वोट-बैंक की राजनीति के तहत देश को तबाह करने वाले आतंकवादियों की खुशामद करेंगे और शहीदों का उपहास उड़ाएंगे।मुस्लिमों का वोट लेने के लिए हमारे कुछ नेताओं के लिए आतंकवादियों की खुशामद और शहीदों का उपहास तो जैसे दैनिक कार्यक्रम में शामिल है।इस कड़ी में एक उदाहरण है-बटला हाउस एनकाउंटर।
   19 सितंबर, 2008 को इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादियों का दिल्ली पुलिस ने एनकाउंटर किया था।यह एनकाउंटर बटला हाउस, जामिया नगर, नई दिल्ली में हुआ था जिसमें दिल्ली पुलिस ने दो आतंकवादियों को मार गिराया था, दो को गिरफ्तार किया था और एक आतंकवादी फरार हो गया था।इस पूरे एनकाउंटर का नेतृत्व किया था एनकाउंटर विशेषज्ञ और दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर श्री मोहन चंद शर्मा ने, जो कि इस घटना में शहीद हो गए।बस तभी से कुछ नेताओं ने इस एनकाउंटर पर भी मुस्लिम वोट-बैंक की गंदी राजनीति शुरू कर दी।कुछ नेताओं ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताया।यहाँ तक कि गृह मंत्री के इस एनकाउंटर को सही ठहराने के बयान के बावजूद भी दिग्विजय सिंह जैसे कुछ नेता बाज नहीं आ रहे हैं और इस एनकाउंटर को लगातार फर्जी बता रहे हैं।समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी इस मुद्दे पर गंदी राजनीति करने से नहीं चुके और उन्होंने भी इस एनकाउंटर की न्यायिक जाँच की माँग की।केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक चुनावी रैली में बड़े गर्व से कहा कि बटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीरें देखने के बाद सोनिया गाँधी के आँसू छलक आए।यह सब बातें बोलकर सलमान खुर्शीद और दिग्विजय सिंह जैसे नेता आखिर क्या साबित करना चाहते हैं?यही कि उनकी पार्टी मुस्लिमों की सबसे बड़ी शुभचिंतक है?ये सब राष्ट्र विरोधी और आतंकवाद समर्थित बातें बोलकर मुस्लिमों को क्या संदेश देना चाहते हैं?क्या यह संदेश देना चाहते हैं कि आप हमें वोट दे दो तो हम आतंकवादियों की भी खुशामद करेंगे?क्या ये नेता यह संदेश देना चाहते हैं कि आप हमें वोट दे दो तो हम शहीदों की शहादत की भी धज्जियां उड़ा देंगे?क्या ये नेता यह संदेश देना चाहते हैं कि हमारे लिए वोट सर्वोपरि है, चाहे वह वोट देश पर अपनी जान कुर्बान करने वाले शहीदों का अपमान करके ही क्यों न मिला हो।
   आतंकवादियों की मौत देखकर सोनिया गाँधी के आँसू छलक आए!क्या शहीदों की शहादत पर उनके आँसू नहीं आए?राहुल गाँधी पूरे उत्तर प्रदेश में विकास करने का ढोल पीट रहे हैं।राहुल जी! किसे बेवकूफ़ बना रहे हैं?आपके पार्टी के नेता रोज खुलेआम शहीदों का उपहास उड़ा रहे हैं और आप विकास की बातें कर रहे हैं!आपकी पूरी पार्टी को देशभक्ति का शुरूआती अक्षर 'द' भी नहीं पता है।जिसे राष्ट्र की इज्जत करना नही आता हो, जिसे शहीदों की देशभक्ति की भी कद्र नहीं हो, वह भला विकास क्या करेगा।आपकी पूरी पार्टी को पहले राष्ट्रवाद और देशभक्ति का पाठ पढ़ने की जरूरत है।     
   सोनिया जी! आपके आँसू उस वक्त कहाँ थे जब रामलीला मैदान में सोए हुए मासूम, निर्दोष लोगों पर पुलिस ने आधी रात को मानवता और इंसानियत की धज्जियां उड़ाते हुए, बेरहमी से लाठीचार्ज किया।अपने देश में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यहाँ के नेता हर एक चीज को वोट-बैंक से जोड़ देते हैं।हर एक काम, हर एक बयान देते हैं वोट-बैंक को ध्यान में रखते हुए।बाबा रामदेव जैसे देशभक्त और उनके समर्थकों को आधी रात को बेरहमी से पीटा गया क्योंकि बाबा में कांग्रेस को कोई वोट-बैंक नजर नहीं आया।जहाँ इन कांग्रेसी नेताओं को वोट-बैंक नजर आता है वहाँ पर तो ये नेता बिल्कुल नहीं चुकते हैं।चाहे उसके लिए इन नेताओं को अफ़जल और कसाब जैसे आतंकवादियों की फाँसी रोकवा कर इनकी खुशामद क्यों न करनी पड़े।अफ़जल और कसाब को फाँसी न देकर ये सरकार उन शहीदों का घोर अपमान कर रही है जिन्होंने एक पल भी यह नहीं सोचा कि उनके बाद उनके परिवार का क्या होगा और देश पर अपनी जान कुर्बान कर दी।सोचो कि अफ़जल जब संसद में बलास्ट करने वाला था उस वक्त वहाँ पर मौजूद जवानों ने कुर्बानी न दी होती तो हो सकता था कि आपमें से कोई नहीं बचता।उन जवानों ने आप नेताओं के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी और आपलोग हैं कि चंद वोटों के लिए उनकी मान-मर्यादा के साथ खिलवाड़ करते हैं।
   दोस्तों, जाटों के आंदोलन को तो आप जानते ही होंगे।न जाने कब से वो आरक्षण की माँग को लेकर रेलवे पटरी जाम करके आंदोलन करते आए हैं।वे तो आरक्षण की माँग करके देश को और ज्यादा खोखला करने की माँग करते हैं, फिर भी उन पर सरकार ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि उनमें सरकार को वोट-बैंक नजर आता है, उल्टा सरकार उनके सामने बेबसी ही दिखाती है।जबकि बाबा रामदेव अपने समर्थकों के साथ रामलीला मैदान में काले-धन, महँगाई और भ्रष्टाचार जैसे जनहित और देशहित मामलों पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे, फिर भी उन पर और उनके समर्थकों पर बड़ी ही बेरहमी से पुलिस ने कार्रवाई की।पुलिस ने कारण बताया कि बाबा के आंदोलन की वजह से कानून व्यवस्था ढीली पड़ रही थी इसलिए उन्होंने कार्रवाई की।क्या जाटों के आंदोलन से कानून व्यवस्था नहीं गड़बड़ाती है जब उनकी बेकार माँग की वजह से कितनी ही रेलगाड़ियों को रद्द करना पड़ता है।यह नेताओं का वोट-बैंक ही है जिसकी वजह से देशहित का मामला उठाने वाले बाबा रामदेव और उनको समर्थकों को भी मार खानी पड़ी और देश को खोखला करने वाले आरक्षण की माँग करने वाले जाट अपनी मन-मर्जी के मुताबिक समय-समय पर रेल-पटरी जाम करते रहते हैं और रेलगाड़ियों को प्रभावित करते रहते हैं, जैसे यह सब उनकी नीजि संपत्ति हो।
   नेताओं को सोचने की जरूरत है कि अगर कभी कोई आतंकवादी किसी नेता के घर में घुस जाता है और उस वक्त पुलिस अगर यह कहकर टाल दे कि आपको मदद की क्या जरूरत है क्योंकि आपलोगों को तो इनकी मौत पर आँसू आ जाते हैं, तब आपका क्या होगा?जरा सोचिए कि उस वक्त आपका क्या होगा जब आतंकवादी आपके घर में हो और पुलिस यह कह दे कि आपको मदद कि क्या जरूरत है, आपलोगों को तो हम जवानों से ज्यादा ये आतंकवादी ही प्यारे हैं।वैसे घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये जवान कभी ऐसा करेंगे नहीं।ये आपलोगों की तरह नहीं हैं।भले ही भ्रष्टाचार हर जगह है लेकिन आज भी इस भ्रष्टाचार के युग में भी ऐसे कुछ देश के जाँबाज सिपाही बचे हैं जिनका दिल देश के लिए धड़कता है।वैसे इन नेताओं का कोई भरोसा नहीं है।जैसी परिस्थिति मैंने कल्पना की है, उस परिस्थिति में अगर पुलिस अपनी जान की बाजी लगा कर इनकी जान भी बचा ले, तब भी ये नेता कहीं इस मुठभेड़ को भी फर्जी ही बताएँगे।
    कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने तो सारी हदें पार कर दी।खुलेआम शहीदों का मजाक उड़ाते हैं।बटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी बताकर वो शहीद मोहन चंद शर्मा का तो मजाक बना ही रहे हैं।साथ-साथ वो पूरे पुलिस-फोर्स का मनोबल गिरा रहे हैं।आखिर वो भी तो सर्वप्रथम इस देश के नागरिक हैं।क्या उनकी अंतरात्मा उन्हें इस बात की अनुमति दे देती है कि आप देश के नागरिकों के लिए शहीद होने वाले जवानों का भी खुलेआम मजाक उड़ाएं?मेरे ख्याल से भारत के किसी भी सच्चे नागरिक को उनकी अंतरात्मा इस बात की अनुमति नहीं देगी।
   आखिर क्या हो गया है मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों को?ये सरकार उन्हें वोट-बैंक की तरह इस्तेमाल कर रही है जिसके लिए रोज इस सरकार के नेता शहीदों की देशभक्ति के चिथड़े उड़ा रहे हैं।इतना सब होने के बावजूद भी वो क्यों चुप हैं?जो भी मुसलमान भाई खुद को इस देश का नागरिक मानते हैं उन्हें इस सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ना चाहिए।आखिर उन्हें क्या समझा जा रहा है?कसाब और अफ़जल को फाँसी न देकर यह सरकार आतंकवादियों को आपका आदर्श बनाने पर तुली हुई है।आखिर आप अपना आदर्श किसे मानते हैं?इन आतंकवादियों को या भारत माता के सच्चे सेवक डॉ कलाम साहब को?फैसला आपको करना है।
   दोस्तों, हमारे देश के प्रधानमंत्री की मशहूर 'चुप्पी' से तो आप वाकिफ होंगे ही।इस गंभीर मुद्दे पर भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।क्या प्रधानमंत्री होने के नाते उनका यह फर्ज नहीं बनता कि वह अपने सभी आतंकवाद समर्थित नेताओं को फटकार लगाएँ।खैर, जब तक वो हैं तब तक यह सोचना तो बेकार ही है कि वह गलती करने वाले अपने नेताओं को फटकार लगाएँ।जब डॉ मनमोहन सिंह ट्वीटर पर आए थे तो हर अखबार में यह चर्चा थी कि अब प्रधानमंत्री किसी मुद्दे पर अपनी चुप्पी नहीं रखेंगे और हर मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करेंगे।लेकिन मुझे तो उनका ट्वीटर पर आने का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा।अगर वह आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अपने कुछ नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया भी नहीं दे सकते, तो उनका ट्वीटर पर रहना व्यर्थ है।
   इस सरकार ने सत्ता में रहने का अधिकार खो दिया है।आप ही बताइए कि कोई भी आतंकवाद समर्थित और राष्ट्र-विरोधी सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार है?जिस तरह से यह सरकार मुस्लिमों को सिर्फ एक वोट-बैंक की तरह इस्तेमाल कर रही है, उसके बावजूद भी अगर मुस्लिम कांग्रेस को वोट देते हैं तो इसमें मुस्लिमों की ही ज्यादा गलती होगी। कांग्रेस खुलेआम आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में कांग्रेस को वोट देना तो आतंकवाद को समर्थन देना ही माना जाएगा।आप ही बताइए कि जहाँ आतंकवाद पूरी दुनिया में खतरा बना हुआ है, वहाँ अगर अपने देश की सत्ताधारी पार्टी ही आतंकवाद समर्थित बयान दे तो कैसे खत्म होगा आतंकवाद?
   पहले नेताओं को समाज का नेतृत्व माना जाता था लेकिन मैं आज के नेताओं को ऐसा नहीं मानता।आखिर समाज का नेतृत्व दिग्विजय सिंह और सलमान खुर्शीद जैसे नेता कैसे कर सकते हैं?जब समाज का नेतृत्व ही दिग्विजय सिंह जैसे आतंकवाद समर्थित नेता करेंगे तो बेड़ा गर्क तो होना ही है ऐसे समाज का।आज के समाज के हीरो शहीद मोहन चंद शर्मा, शहीद हेमंत करकरे और उनके जैसे और भी कई भारत माता के सच्चे सेवक हैं जोकि भारत माता पर आँच आने पर अपनी जान कुर्बान कर देते हैं।मुझे समझ नहीं आता कि कांग्रेस के नेताओं को सोनिया गाँधी में नेतृत्व क्षमता क्यों दिखाई देती है?जिन्हें आतंकवादियों की मौत पर आँसू आ जाए, वो भला देश का नेतृत्व क्या करेंगी।जिस भारत में बच्चों को विद्यालय से ही देश के जाँबाज स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताया जाता है, जिस भारत में वन्दे-मात्रम सुनते ही बच्चों की आँखों में आँसू आ जाते हैं, उस भारत में दिग्विजय सिंह, सलमान खुर्शीद और सोनिया गाँधी जैसे नेता आखिर समाज को क्या संदेश देंगे?क्या यह संदेश देंगे कि देश के शहीदों पर नहीं बल्कि आतंकवादियों के एनकाउंटर पर आँसू बहाओ?मेरी जनता से यह गुजारिश है कि जो भी नेता शहीदों का मजाक उड़ाएं, उन्हें अच्छी तरह से पहचान लो।उन नेताओं को आने वाले लोकसभा चुनाव में बिल्कुल वोट मत देना।उन्हें कोई अधिकार नहीं है शहीदों का अपमान करके संसद में जाने का।शहीदों का अपमान करने वाले एक-एक नेताओं को सबक सिखाओ।भारत माता के सच्चे सेवकों का जिन-जिन नेताओं ने मजाक उड़ाया है उन्हें कतई वोट मत देना।जो भी खुद को भारत के सच्चे नागरिक मानते हैं, वो कांग्रेस को कभी वोट नहीं देंगे।जिनमें भारत माता के प्रति थोड़ी भी आस्था होगी, वो कांग्रेस को कभी वोट नहीं देंगे।देश को कोई जरूरत नहीं है ऐसे नेताओं कि जो शहीदों का सम्मान करना भी नहीं जानते हो।उन सभी नेताओं पर मुकदमा चलना चाहिए जिन्होंने खुलेआम शहीदों का अपमान करके उनकी देशभक्ति की भावना को ठेस पहुँचाई है।अत: मैं आप सभी से गुजारिश करता हूँ कि अगर अपने देश का भला चाहते हैं तो कांग्रेस को कभी वोट मत देना।कांग्रेस ने शहीदों के साथ-साथ भारत माता के प्रति उनकी मर-मिटने की भावना को भी चोट पहुँचाई है, जिसकी सजा उसे मिलनी चाहिए।आइए हम सब कांग्रेस को वोट न देकर शहीदों को नमन करें और भारत माता की जयजयकार करें।वे (शहीद) हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे और हमें हमेशा देशभक्ति का पाठ पढ़ाते रहेंगे।
जय हिंद! जय भारत!           


           

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